Day: February 22, 2026

यह कविता एक पिता के मूक संघर्ष का प्रतिबिंब है। जिस तरह जड़ खुद अंधेरे और दबाव (Pressure) में रहकर पूरे पेड़ को खड़ा रखती है, वैसे ही पिता खुद के सपनों और जरूरतों का त्याग कर परिवार की नींव बनते हैं। उनका कठोर व्यवहार (आलोचक रूप) वास्तव में बच्चों को सही राह दिखाने का एक तरीका है। यह रचना उनके 'अनुल्लिखित' (unspoken) बलिदानों को समर्पित है।
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