Don't ask about the crumbling government schools. Don't ask about the pothole-ridden roads. Just hand over the hard-earned money and look the other way.
A bitter, honest, and satirical take on the endless cycle of the tax-paying common man.
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यह कविता एक पिता के मूक संघर्ष का प्रतिबिंब है। जिस तरह जड़ खुद अंधेरे और दबाव (Pressure) में रहकर पूरे पेड़ को खड़ा रखती है, वैसे ही पिता खुद के सपनों और जरूरतों का त्याग कर परिवार की नींव बनते हैं। उनका कठोर व्यवहार (आलोचक रूप) वास्तव में बच्चों को सही राह दिखाने का एक तरीका है। यह रचना उनके 'अनुल्लिखित' (unspoken) बलिदानों को समर्पित है।
हर शिशु, इस संसार में आने से पहले, एक कोरी स्लेट होता है—असीम संभावनाओं से भरा एक पवित्र बीज। माता-पिता के रूप में, हमारा सबसे पहला और सबसे गहरा स्वप्न यही होता है कि यह नवजीवन सिर्फ सफल न हो, बल्कि उत्तम हो; कि यह शक्ति और करुणा, ज्ञान और सरलता, साहस और नैतिक बल […]
यह कविता प्रकृति और जीवन से जुड़े अनगिनत प्रश्नों को अपनी पंक्तियों में समेटती है। इसमें बादल, सूरज, पेड़, पानी, चाँद और सितारे—हर तत्व से संवाद है। हर सवाल हमें यह सोचने पर मजबूर करता है कि क्या ये सब अपनी मर्ज़ी से होता है, या किसी अदृश्य नियम से बंधा हुआ है। यह रचना सिर्फ़ प्रकृति का वर्णन नहीं, बल्कि हमारे अस्तित्व की गहराई में उतरने की कोशिश भी है।
माँ मेरी थी गणित में कच्ची,
पर प्यार का हिसाब उनसे अच्छा कोई न रख पाया।
उनकी साधारण सी जिंदगी,
मेरे लिए सबसे अनमोल कहानी बन गई।
बचपन की उस मासूम दुनिया में,
जहाँ सपने हक़ीक़त से ज़्यादा सच्चे थे।
यह कविता उसी उड़ान, उसी मुस्कान की याद है।