Author: Vedant Khandelwal

कभी किसी को देख के लगता है की ये कुछ अलग ही है, इसके अंदर कुछ अलग करने की चाह है। कुछ ऐसे ही लोगों की कहानी लिखी है इस कविता में।
यह कविता मेरी दिवंगत मां को समर्पित है। माँ, आपकी आहट को तरसता हुँ।
तू कैसे समझ लेती थी मुझे? माँ और बच्चे के प्रेम पे हिंदी कविता। एक छोटा बच्चा किस तरह से अपनी और अपनी माँ की कहानी बयान करता है।
कभी मजबूरी तो कभी ज़रुरत। हम में से बहुत से लोगों को घर छोड़ के बहार रहना पड़ा। कुछ पंक्तियाँ हैं उसी अनुभव के बारे में - घर से निकलते ही
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Like Vs Love
I heard the line “You like because, and you love despite” in the movie “Set It Up”, and it remained with me. It inspired me to write this poetry. It is all about the feeling of love, which is a little confused, more selfless, and a lot more giving. You like because, and you love […]
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