Tag: life

यह कविता एक पिता के अपने नन्हें बेटे के प्रति गहरे, निस्वार्थ प्रेम और वात्सल्य को दर्शाती है। बच्चे के छोटे-छोटे हाथों का स्पर्श पिता की सारी थकान और चिंताओं को मिटा देता है। उसकी किलकारियाँ, मासूम मुस्कान और चुलबुली नज़रें घर में खुशियों के रंग भर देती हैं। सबसे अनमोल वह पल है जब बच्चा भरी दुनिया में केवल अपने पिता का चेहरा ढूँढता है, जो एक पिता के दिल को असीम सुकून और गर्व से भर देता है।
यह कविता एक पिता के मूक संघर्ष का प्रतिबिंब है। जिस तरह जड़ खुद अंधेरे और दबाव (Pressure) में रहकर पूरे पेड़ को खड़ा रखती है, वैसे ही पिता खुद के सपनों और जरूरतों का त्याग कर परिवार की नींव बनते हैं। उनका कठोर व्यवहार (आलोचक रूप) वास्तव में बच्चों को सही राह दिखाने का एक तरीका है। यह रचना उनके 'अनुल्लिखित' (unspoken) बलिदानों को समर्पित है।
बचपन की उस मासूम दुनिया में, जहाँ सपने हक़ीक़त से ज़्यादा सच्चे थे। यह कविता उसी उड़ान, उसी मुस्कान की याद है।
यह एक पुराने घर की कहानी है, जो अपने अतीत की यादों को साझा करता है।
कविता एक युवक की नौकरी की वास्तविकता को दर्शाती है, जो बड़े फ़र्म में नौकरी करने के सपने देखता है, लेकिन वास्तव में उसे दबाव और लंबे काम के घंटों का सामना करना पड़ता है। वह महसूस करता है कि पैसे के लिए लोग अपनी अकल और जीवन को बेच देते हैं
मैं मिर्ज़ापुर के झरनों से हूँ,तुम बनारस की गलियों से.मैं विंध्य पर्वत का वासी हूं,तुम शिव की पवित्र काशी से। घाटों घाटों में खो जाऊं,गंगा से अक्षर पहुचाऊं,मैं शक्ति का, तुम भोले की,नगरी-नगरी की जोड़ी थी. मैं आधा था, तुम बाकी थी.मैं मिर्ज़ापुर, तुम काशी थी। मैं मिर्ज़ापुर के झरनों से हूँ,तुम बनारस की गलियों […]
Archives
Follow by Email
LinkedIn
LinkedIn
Share
Instagram