Tag: poem

यह कविता एक पिता के अपने नन्हें बेटे के प्रति गहरे, निस्वार्थ प्रेम और वात्सल्य को दर्शाती है। बच्चे के छोटे-छोटे हाथों का स्पर्श पिता की सारी थकान और चिंताओं को मिटा देता है। उसकी किलकारियाँ, मासूम मुस्कान और चुलबुली नज़रें घर में खुशियों के रंग भर देती हैं। सबसे अनमोल वह पल है जब बच्चा भरी दुनिया में केवल अपने पिता का चेहरा ढूँढता है, जो एक पिता के दिल को असीम सुकून और गर्व से भर देता है।
यह कविता एक पिता के मूक संघर्ष का प्रतिबिंब है। जिस तरह जड़ खुद अंधेरे और दबाव (Pressure) में रहकर पूरे पेड़ को खड़ा रखती है, वैसे ही पिता खुद के सपनों और जरूरतों का त्याग कर परिवार की नींव बनते हैं। उनका कठोर व्यवहार (आलोचक रूप) वास्तव में बच्चों को सही राह दिखाने का एक तरीका है। यह रचना उनके 'अनुल्लिखित' (unspoken) बलिदानों को समर्पित है।
कमल नयन, चंचल मुस्कान, मेघ वर्ण, आये भगवान।
मैं मिर्ज़ापुर के झरनों से हूँ,तुम बनारस की गलियों से.मैं विंध्य पर्वत का वासी हूं,तुम शिव की पवित्र काशी से। घाटों घाटों में खो जाऊं,गंगा से अक्षर पहुचाऊं,मैं शक्ति का, तुम भोले की,नगरी-नगरी की जोड़ी थी. मैं आधा था, तुम बाकी थी.मैं मिर्ज़ापुर, तुम काशी थी। मैं मिर्ज़ापुर के झरनों से हूँ,तुम बनारस की गलियों […]
मारवाड़ी की कहानी
भारत वर्ष में और सनातन धर्म में प्रश्न करना कोई गलत बात नहीं है, बल्कि उसे सत्य और ज्ञान की परीक्षा का रूप दिया गया है। प्रश्न करना गलत नहीं है, गलत है अंध-विश्वास, गलत है ज्ञान ना होना, गलत है बिना प्रश्न के गलत राह पे चलना, क्यूंकि बाकी सब भी वही कर रहे हैं। इसी विचार से प्रेरित हो के मैंने यह कविता लिखी है। आशा करता हूँ आपको पसंद आएगी।
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