तुम बस मुस्कुराती रहा करो

तुम बस मुस्कुराती रहा करो

तुम बस मुस्कुराती रहा करो – A hindi poem about, what every man wants to tell her lady love…

ग़म बहुत हैं ज़माने में
मुझे पता है
पर ऐसा लगता है की
वो तुम्हारे लिए नहीं बने हैं
अगर तुम्हारे लिए कुछ बना है तो
वो बस मैं हूँ

तुम्हारे कारन मैं अच्छा लगता हूँ खुद को
खुश रखता हूँ खुद को की तुम खुश रहो
की खुश रख सकूँ तुमको
क्यूंकि तुम बस मुस्कुराती रहा करो
अच्छा लगता है

क्यों ना खुश रखूं तुम्हे ?
तुमने बिना बताए मुझे बेहतर बनाया
मेरे हर एक दुःख को अपना बनाया
जब मैं ज़िन्दगी से रूठा था , तो तुमने मुझे मनाया
तो अब मुझे ये मेरी ज़िम्मेदारी लगता है
की जब तुम रूठो तो तुम्हे मनाऊं
जब हो दुखी तो तुम्हे हसाऊँ
जोकर बना फिरता हूँ
की शायद तुम गम में भी हस दो
क्यूंकि तुम बस मुस्कुराती रहा करो
अच्छा लगता है

इसलिए तो अब जब गम आता है हमारे बीच
तो हस लेता हूँ
की शायद तुम भी हसना सीख जाओ
इस दुःख की दुनिया को नज़रअंदाज़ करना सीख जाओ
क्यूंकि गम बहुत हैं ज़माने में
मुझे पता है
पर ऐसा लगता है की
वो तुम्हारे लिए नहीं बने हैं
अगर तुम्हारे लिए कुछ बना है तो
वो बस मैं हूँ

– वेदांत खंडेलवाल

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